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Monday, 8 September 2014

जलवायु परिवर्तन

जलवायु मे हो रहा परिवर्तन

क्या मनुष्यों को प्रकृति के सामने करना पड़ेगा आत्मसमर्पण



दूषित हुईनदियाँ कट गए पेड़

मनुष्यों ने अपने फायदे के लिए प्रकृति से खेला खेल

जब खेला है खेल तो प्रकृति कैसे रहती पीछे

उसने भी चली चाल पीछे पीछे



मनुष्यों के प्रहार से प्रकृति ने बदला व्यव्हार

इस व्हाय्व्हार से मनुष्य हुआ बेहाल

तापमान बदला मौसम बदले

प्राकृतिक आपदाओं की हुई भरमार



जलवायु मे हो रहा परिवर्तन

क्या मनुष्यों को प्रकृति के सामने करना पड़ेगा आत्मसमर्पण



अब भी समय है जाग जा मनुष्य

प्रकृति के सामने हार जा मनुष्य

प्रकृति कर देगी तेरा बुरा हाल

समझौता करके रह खुशहाल



पेड़ लगा, प्रदुषण रोक

प्रकृति को मत करने दे तेरा भोग

अपनी धरती माँ को बचा

प्रकृति को तू ना सता



जलवायु मे हो रहा परिवर्तन
क्या मनुष्यों को प्रकृति के सामने करना पड़ेगा आत्मसमर्पण



Gaurav Hans
Y14 Undergraduate, The LNMIIT